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“25 साल बाद डॉक्टर से मिली मरीज, बोली – आज सामान्य जीवन जी रही हूं, आपका आभार”
इंदौर। चिकित्सा का असली उद्देश्य केवल रोग का उपचार करना नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति को सामान्य और आत्मनिर्भर जीवन लौटाना भी है। इसी का भावुक उदाहरण हाल ही में सामने आया, जब जन्मजात क्लबफुट (टेलीप्स इक्वाइनो वेरस) से पीड़ित रही रश्मि (बदला हुआ नाम) लगभग 25 वर्ष बाद अपने परिवार और बच्चे के साथ डॉ. प्रमोद पी. नीमा से मिलने पहुंचीं। बचपन में हुई सर्जरी के कारण आज वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और सहज जीवन जी रही हैं।
रश्मि की उम्र करीब पाँच वर्ष थी, जब उनके पैर में गंभीर विकृति थी। उस समय डॉ. नीमा ने सर्जरी कर उनके पैर को सामान्य रूप दिया। उपचार के परिणामस्वरूप आज वह बिना किसी परेशानी के चल-फिर सकती हैं, पारिवारिक जीवन व्यतीत कर रही हैं और एक बच्चे की माँ भी हैं। ढाई दशक बाद डॉक्टर से पुनर्मिलन का क्षण भावुक कर देने वाला था। रश्मि ने कहा कि बचपन में सही समय पर उपचार मिलने से ही आज उनका जीवन इतना सहज और आत्मनिर्भर है। उन्होंने अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभाने की क्षमता का श्रेय डॉ. नीमा और उनकी टीम को दिया।
डॉ. प्रमोद पी. नीमा ने कहा कि एक सर्जन के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यही होती है कि वर्षों बाद मरीज स्वस्थ और खुशहाल जीवन जीते हुए मिले। उन्होंने रश्मि को अपने परिवार और बच्चे के साथ देखकर संतोष व्यक्त किया और कहा कि यह हमें याद दिलाता है कि समय पर किया गया सही उपचार किसी व्यक्ति का भविष्य बदल सकता है।
उन्होंने आगे बताया कि जन्मजात क्लबफुट का समय पर उपचार और आवश्यकता पड़ने पर सर्जरी कराने से अधिकांश बच्चे सामान्य जीवन जी सकते हैं। अभिभावकों से उन्होंने अपील की कि यदि नवजात या छोटे बच्चों के पैरों में किसी प्रकार की विकृति दिखाई दे तो बिना देरी किए विशेषज्ञ से परामर्श लें, क्योंकि शुरुआती उपचार के परिणाम सबसे बेहतर होते हैं।


